उत्तराखंडदेहरादून

अब भूमि धोखाधड़ी पर बड़ा प्रहार: 51 मामलों में न्याय, दोषियों के खिलाफ मुकदमे के निर्देश

देहरादून। प्रदेश में भूमि धोखाधड़ी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को सख्ती से लागू करते हुए प्रशासन ने अब निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है। गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय की अध्यक्षता में सोमवार को सर्वे चौक स्थित कैंप कार्यालय में आयोजित लैंड फ्रॉड समन्वय समिति की बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए, जिनसे भूमाफियों में हड़कंप मच गया है।

बैठक में पूर्व में 17 जून 2025 को दिए गए निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा के साथ-साथ 11 लंबित और 51 नए मामलों पर विस्तार से सुनवाई की गई। इनमें से कुल 51 मामलों का निस्तारण किया गया, जबकि 5 गंभीर मामलों में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए।

आयुक्त ने स्पष्ट कहा कि भूमि धोखाधड़ी जैसे गंभीर मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन मामलों में संयुक्त निरीक्षण आवश्यक है, उन्हें एक सप्ताह के भीतर पूरा कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। साथ ही तहसील स्तर से प्राप्त रिपोर्टों की गहन जांच सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की त्रुटि पाए जाने पर संबंधित अधिकारी सीधे जिम्मेदार होंगे।

सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के मामलों में अनिवार्य रूप से एफआईआर दर्ज कराने और पुलिस जांच को प्रभावी बनाने के निर्देश भी दिए गए। आयुक्त ने कहा कि भूमि धोखाधड़ी के मामलों में विशेष अभियान चलाकर त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जाए और प्रगति रिपोर्ट समयबद्ध रूप से प्रस्तुत की जाए। जिन मामलों में धोखाधड़ी स्पष्ट है, उनमें एसआईटी जांच के भी निर्देश दिए गए हैं।

बैठक के दौरान कुछ चौंकाने वाले मामले भी सामने आए। एक प्रकरण में राजस्थान के निवासियों द्वारा रुद्रप्रयाग में आवासीय भूमि खरीदकर उस पर होटल निर्माण और फिर बिक्री करने का मामला सामने आया। इसके साथ ही ऋषिकेश में भी संदिग्ध भूमि लेनदेन का खुलासा हुआ। जांच में उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम की धारा-154 का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित भूमि को सरकार में निहित करने और धारा 166 व 167 के तहत कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए।

एक अन्य मामले में देहराखास निवासी के खिलाफ भी विधिक राय के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई। इसके अलावा कई मामलों में भूमाफियों द्वारा एक ही खसरे की भूमि को दो अलग-अलग व्यक्तियों को बेचने और अन्य स्थान की भूमि पर कब्जा दिलाने जैसे गंभीर फर्जीवाड़े उजागर हुए हैं। इन सभी मामलों में कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। वहीं कुछ शिकायतें जांच में निराधार पाई गईं, जिन्हें खारिज कर दिया गया।

आंकड़ों के अनुसार, कुल 170 लैंड फ्रॉड मामलों में से अब तक 77 मामलों की सुनवाई पूरी हो चुकी है, जिनमें 51 का निस्तारण किया जा चुका है। शेष मामलों के लिए एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट तलब की गई है और 15 दिनों के भीतर पुनः समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि वादियों को शीघ्र न्याय मिल सके।

आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि न्यायालय में लंबित मामलों को छोड़कर अन्य सभी मामलों में विभागीय स्तर पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और किसी भी प्रकरण को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए। साथ ही न्यायालय के आदेशों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया गया।

बैठक में उप जिलाधिकारी सदर एवं ऋषिकेश की अनुपस्थिति पर आयुक्त ने कड़ी नाराजगी जताते हुए स्पष्टीकरण तलब करने के निर्देश दिए। वहीं एक प्रकरण में तहसीलदार द्वारा आवश्यक जानकारी प्रस्तुत न करने पर उन्हें तत्काल ऋषिकेश रवाना कर एक घंटे के भीतर पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।

इस महत्वपूर्ण बैठक में पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल राजीव स्वरूप, अपर आयुक्त उत्तम सिंह चौहान, एसपी (ग्रामीण) जया बलूनी, डीजीसी नितिन वशिष्ठ, एसडीएम डोईवाला अपर्णा ढौंडियाल, एसडीएम कुमकुम जोशी, एसडीएम विकासनगर विनोद कुमार, संयुक्त सचिव एमडीडीए गौरव चटवाल, एसडीएम कर्णप्रयाग सोहन सिंह रांगड़, एसडीएम रुद्रप्रयाग सोहन सिंह सैनी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button