उत्तराखंड

उत्तराखंड के चहुमुंखी विकास के लिए काम करें बैंक : धामी

राज्य में ₹64 हजार करोड़ के निवेश की ग्राउंडिंग पर काम शुरू

मुख्यमंत्री ने एचडीएफसी बैंक की 111वीं शाखा, चार धाम में एटीएम सेवा का वर्चुअल शुभारंभ किया

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को अवसरों और विकास का राज्य बनाने के लिए कृतसंकल्पित है। बैंक राज्य के चहुमुंखी विकास के लिए काम करें। बैंकिंग सुविधाएं राज्य के हर एक व्यक्ति तक पहुंचें। मुख्यमंत्री शुक्रवार को मुख्य सेवक सदन में एचडीएफसी बैंक की ओर से आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित बैंक अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने बैंक की 111वीं शाखा, चारों धाम में एटीएम सेवा एवं यूकाडा के विभिन्न सॉफ्टवेयर का वर्चुअल शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के आत्मनिर्भर भारत के मंत्र को सिद्धि तक पहुंचाने के लिए बैंकों को भी अपनी योजनाएं गांव के अंतिम छोर के व्यक्ति तक पहुंचानी होगी। आम जरूरतमंद व्यक्ति को ऋण योजनाओं का लाभ देने के लिए प्रक्रिया को सरल बनाना होगा। उन्होंने हवालबाग (अल्मोड़ा) का एक उदाहरण देते हुए कहा कि आज लोगों में बैंकिंग योजनाओं को लेकर काफी उत्साह है। बैंकों में खाते होने की वजह से ही डबल इंजन सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का पूरा पैसा सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंच रहा है। पूर्व में बिचौलियों के कारण पूरा पैसा उन्हें नहीं मिलता था।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड को देश का आदर्श राज्य बनाने के लिए उनकी सरकार प्रतिबद्ध है। इसके लिए यहां बैंकिंग, कारपोरेट और अन्य व्यवसायों को स्थापित करने के लिए सरकार निरंतर काम कर रही है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए पिछले वर्ष दिसंबर माह में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन हुआ। समिट में ₹ढाई लाख करोड़ के लक्ष्य के विपरीत ₹साढ़े तीन लाख करोड़ के निवेश के एमओयू हुए हैं। अब ₹64 हजार करोड़ के निवेश की ग्राउंडिंग पर काम शुरू हो चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एचडीएफसी बैंक प्रबंधन ने राज्य में पांच लाख पौधे रोपित करने का जो लक्ष्य निर्धारित किया है, वह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम कदम है। इससे पूर्व केदारनाथ और जोशीमठ की आपदा में भी बैंक ने सराहनीय योगदान दिया है। उन्होंने बैंक अधिकारियों से विकल्प रहित संकल्प के साथ काम करने का आह्वान कर कहा कि संकल्प का कोई विकल्प न हो तो रास्ते स्वत: मिल जाते हैं और सपने भी अपने हो जाते हैं। संकल्प में विकल्प आ जाए तो संकल्प छूट जाता है, सपने छूमंतर हो जाते हैं और मंजिल से भी भटक जाते हैं। कार्यक्रम में उत्तराखंड सरकार के अपर सचिव सी रविशंकर भी उपस्थित थे।

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