उत्तराखंड

उत्तराखंड में स्वास्थ्य योजनाओं का नया मॉडल? आयुष्मान–गोल्डन कार्ड सेवाओं में क्या बदलेगा

देहरादून: उत्तराखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर और अधिक सुलभ बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने इस साल बड़े बदलाव करने का लक्ष्य तय किया है। इन बदलावों का सीधा असर राज्य की दो प्रमुख स्वास्थ्य योजनाओं— अटल आयुष्मान योजना और गोल्डन कार्ड योजना—पर पड़ेगा।

राज्य सरकार ने पिछले साल यह फैसला लिया था कि अटल आयुष्मान योजना को इंश्योरेंस मोड पर और गोल्डन कार्ड योजना को हाइब्रिड मोड पर संचालित किया जाएगा। इस निर्णय के लागू होने से न केवल आम जनता को इलाज में सहूलियत मिलेगी, बल्कि राज्य सरकार पर बढ़ते खर्च का बोझ भी कम होगा।

उत्तराखंड में अटल आयुष्मान योजना की शुरुआत 25 दिसंबर 2018 को की गई थी। इस योजना के तहत अब तक 17 लाख से अधिक मरीजों को निशुल्क इलाज का लाभ मिल चुका है, जिस पर राज्य सरकार करीब 3400 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है। प्रदेश में अब तक 61 लाख से अधिक लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। यह योजना गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा की रीढ़ साबित हुई है।

अब हाइब्रिड मोड पर गोल्डन कार्ड योजना

वहीं, गोल्डन कार्ड योजना के तहत पिछले पांच वर्षों में लगभग 750 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इस योजना में कर्मचारियों की ओर से दिया जाने वाला अंशदान करीब 60 से 65 प्रतिशत रहा है। इन्हीं आंकड़ों को देखते हुए राज्य सरकार ने दोनों योजनाओं के संचालन में बदलाव करने का निर्णय लिया। इस प्रस्ताव को 24 दिसंबर को हुई कैबिनेट बैठक में मंजूरी दी गई, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद अटल आयुष्मान योजना के तहत अब इलाज का भुगतान सीधे इंश्योरेंस कंपनी के माध्यम से किया जाएगा। पहले यह भुगतान राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा अस्पतालों को किया जाता था।

बदलाव से लाभार्थियों को नहीं होगा नुकसान

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन उत्तराखंड की मिशन निदेशक रीना जोशी ने स्पष्ट किया कि इस बदलाव से लाभार्थियों को किसी तरह का नुकसान नहीं होगा। आयुष्मान कार्ड धारकों को पहले की तरह ही निशुल्क इलाज की सुविधा मिलती रहेगी। उन्होंने बताया कि इंश्योरेंस मोड लागू होने के बाद भी आयुष्मान कार्ड वही रहेगा और किसी नए नंबर या कार्ड की आवश्यकता नहीं होगी। इससे योजना की कार्यक्षमता और पारदर्शिता दोनों बढ़ेंगी।

नया हाइब्रिड मॉडल क्या है

स्वास्थ्य महानिदेशक सुनीता टम्टा ने बताया कि गोल्डन कार्ड योजना को अब हाइब्रिड मोड पर चलाया जाएगा। इसके तहत 5 लाख रुपये तक का इलाज कैशलेस रूप से जारी रहेगा। यदि किसी मरीज के इलाज का खर्च 5 लाख रुपये से अधिक होता है, तो अतिरिक्त राशि को इंश्योरेंस मोड के जरिए कवर किया जाएगा। इससे कर्मचारियों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा मिलेगी और योजना लंबे समय तक टिकाऊ बनी रहेगी। इस बदलाव के बाद मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के लिए कम कागजी कार्रवाई, तेज क्लेम प्रक्रिया और अधिक सुविधा मिलेगी। अस्पतालों को भी समय पर भुगतान होने से इलाज की गुणवत्ता बेहतर होगी।

राज्य सरकार का मानना है कि इंश्योरेंस और हाइब्रिड मॉडल अपनाने से सरकार पर निशुल्क इलाज का बढ़ता आर्थिक दबाव कम होगा। इससे भविष्य में अस्पतालों, चिकित्सा उपकरणों और स्वास्थ्य कर्मियों पर अधिक निवेश किया जा सकेगा।

कुल मिलाकर, अटल आयुष्मान और गोल्डन कार्ड योजनाओं में किया गया यह बदलाव जनहित और प्रशासनिक मजबूती की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इससे जहां सरकार का खर्च संतुलित होगा, वहीं आम जनता को आसान, तेज और भरोसेमंद स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती रहेंगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button