नेहरू कॉलोनी स्थित चारधाम अस्पताल के संचालक एवं वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. केपी जोशी दे रहे महत्वपूर्ण जानकारी
संवाददाता
देहरादून। बदलते मौसम का मिजाज पहले की तुलना में कुछ अलग हो रहा है। अब मौसम उस प्रकार से सीरियल वाइज नहीं आ रहे हैं। नेहरू कॉलोनी, देहरादून स्थित चारधाम अस्पताल के संचालक एवं वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. केपी जोशी का मानना है कि कभी ज्यादा गर्मी तो कभी कम सर्दी से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता पर विपरीत असर पड़ता है। पर्यावरण प्रदूषण, जो पानी से लेकर मिट्टी और हवा में फैल चुका है वह शरीर पर गंभीर असर डाल रहा है। डॉ. केपी जोशी ने कहा कि इसका परिणाम यह है कि आज का जुखाम बिल्कुल बदला है। खांसी लगातार महीनों से चल रही है। कारण पूरे भारत में केवल इलाज पर फोकस है। इसका कारण और बचाव की बात कोई नहीं करता।

ऑप्रट्यूनिस्टिक वायरल इन्फेक्शन इसे और जटिल बना रहे हैं। स्मोग जो कि नमी व वातावरण के प्रदूषण से बनता है, साईनेज़ व अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट में जमा हो रहा। ड्राई खांसी वा ब्रॉनकोस्पास्म को जन्म दे रहा है।एलर्जिक फ्लोरा फ़ाउना रिएक्शन जो राइनिटिस एलर्जिक अस्थमा करता है, उतना हानिकारक नहीं जितना स्मोग द्वारा आजकल वायरल इन्फेक्शन जो sinusitis के बाद पूरा PUO की परिभाषा दे रहा है। अतः आज के जुकाम खांसी को सिंपल URTI न समझे। डॉ. जोशी कहते हैं कि उपरोक्त लाइन पर इलाज करें। अन्फॉर्चूनेटली इस panindia समस्या पर न एक्सपर्ट का ध्यान गया है न मेडिकल ENT कान्फ्रेंसेज या एकडेमिक इंस्टीट्यूशन में कोई डिस्कशन या गाइडलाइन आ रही है। स्टेरॉयड का प्रयोग घातक हो सकता है। अतः जुखाम-खांसी को सर्दियों में हल्के में न लें और अपने डॉक्टर से सलाह लें।
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