उत्तराखंडदेहरादून

देहरादून में रातोंरात स्कूल बदला, अभिभावकों-छात्रों का हंगामा

देहरादून। दून में एक अजब गजब मामला सामने आया है। यहां रातोंरात एक स्कूल का नाम बदल गया। यहां तक कि स्कूल के शिक्षक भी बदल दिए गए। अभिभावक सुबह बच्चों को स्कूल छोड़ने पहुंचे, तब उन्हें इसकी जानकारी मिली। जिस पर हंगामा खड़ा हो गया। छात्र, अभिभावक व शिक्षकों ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

नई प्रधानाचार्य व शिक्षकों को भीतर दाखिल नहीं होने दिया। नये स्कूल के फ्लेक्स भी फाड़ डाले। दोपहर बाद इस मामले को लेकर वार्ता हुई, जो बेनतीजा रही। जिस पर अभिभावकों ने स्थिति स्पष्ट होने तक बच्चों को स्कूल न भेजने का एलान किया है।

अभिभावकों, छात्रों और कर्मचारियों में तीखा आक्रोश

विद्यालय का संचालन डीएवी पब्लिक स्कूल को सौंपे जाने के फैसले के बाद अभिभावकों, छात्रों और कर्मचारियों में तीखा आक्रोश देखने को मिला। गुरुवार सुबह स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब विद्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ और देखते ही देखते माहौल हंगामेदार बन गया।

सुबह स्कूल खुलते ही अभिभावक और छात्र जैसे ही परिसर पहुंचे, गेट पर नया बोर्ड देखकर वे हैरान रह गए। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने स्कूल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

विद्यालय वर्ष 1993 से संचालित है और वर्तमान में यहां लगभग 150 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। पूरे घटनाक्रम ने अभिभावकों, छात्रों और कर्मचारियों तीनों को असंतोष की स्थिति में ला दिया है। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

नेशनल एसोसिएशन फार पैरेंट्स एंड स्टूडेंट्स राइट्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरिफ खान ने बताया कि दोपहर बाद डीआरडीओ प्रबंधन ने अभिभावकों व शिक्षकों से अलग-अलग वार्ता की।

शिक्षकों ने अपने सेवा शर्तों व वेतन आदि की बात रखी, जबकि अभिभावकों की मांग थी कि तीन साल तक कापी-किताब, यूनिफार्म व फीस में कोई बदलाव न किया जाए। पर इन बिंदुओं पर कोई सहमति नहीं बन पाई। ऐसे में अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल न भेजने का एलान कर दिया है।

एकाएक हुए बदलाव से अभिभावक चिंता में

अभिभावकों का कहना है कि प्रबंधन परिवर्तन के बारे में उन्हें पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई, जिससे वे पूरी तरह असमंजस में हैं। हाल ही में शुरू हुए सत्र के लिए खरीदी गई किताबें और यूनिफार्म अब अनुपयोगी होने की स्थिति में हैं, क्योंकि नई व्यवस्था के तहत अलग सामग्री लागू किए जाने की बात सामने आ रही हैं।

फीस संरचना में बदलाव की आशंका ने भी उन्हें चिंता में डाल दिया है। उनकी मांग है कि प्रबंधन परिवर्तन पर स्पष्टता दी जाए और मौजूदा सत्र में पुरानी व्यवस्था को जारी रखा जाए। साथ ही नई व्यवस्था लागू करने से पहले समय और स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएं।

कर्मचारियों की स्थिति पर सवाल

विद्यालय से जुड़े कर्मचारियों का आरोप है कि लंबे समय से कार्यरत स्टाफ को बिना किसी पूर्व सूचना के सेवा से हटाया जा रहा है। इनमें कई ऐसे कर्मचारी शामिल हैं जो 25 से 30 वर्षों से संस्थान से जुड़े हुए थे।

उनका यह भी कहना है कि डीआरडीओ से संबद्ध व्यवस्था के तहत उन्हें केंद्रीय स्तर के समान वेतन और सुविधाएं मिलती रही हैं, लेकिन अचानक हुए इस बदलाव ने उनके भविष्य को असुरक्षित कर दिया है। स्कूल प्रधानाचार्य विनय भटनागर ने कहा कि डीआरडीओ ने स्कूल के संचालन की जिम्मेदारी डीएवी को दे दी है। विद्यालय के स्टाफ को डीएवी की शर्तों पर काम करना होगा।

छात्रों में भी दिखा गुस्सा, विरोध में उतरे

छात्रों ने भी अभिभावकों के साथ मिलकर प्रदर्शन में हिस्सा लिया और विद्यालय परिसर में विरोध दर्ज कराया। गेट पर लगे नये प्रबंधन के फ्लैक्स को हटाकर नाराजगी व्यक्त की गई, जिससे परिसर में तनाव का माहौल बन गया। विरोध के चलते शैक्षणिक गतिविधियां भी प्रभावित रहीं और पूरे दिन अनिश्चितता बनी रही।

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