उत्तराखंडदेहरादून

धामी सरकार में दायित्वों का पिटारा खुला: चुनाव से पहले बीजेपी नेताओं की लगी लॉटरी

देहरादून: उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के बीच धामी सरकार ने राजनीतिक दायित्वों का पिटारा खोल दिया है। सरकार संगठन के नेताओं और कार्यकर्ताओं को संतुष्ट करने व सक्रिय रखने के लिए लगातार विभिन्न बोर्डों, निगमों, परिषदों और आयोगों में नियुक्तियां कर रही है। एक दिन पहले कई बड़े नेताओं को जिम्मेदारी सौंपने के बाद गुरुवार को भी नियुक्तियों का यह सिलसिला जारी रहा। राजनीतिक गलियारों में इसे चुनावी समीकरणों को साधने की बड़ी कवायद माना जा रहा है।

ताजा आदेश: माधव सेमवाल BKTC के सलाहकार और मनोज कलाकोटी SC आयोग के उपाध्यक्ष नियुक्त

मंत्रिपरिषद अनुभाग द्वारा जारी ताजा कार्यालय ज्ञापनों के अनुसार, बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं:

माधव सेमवाल: इन्हें श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) में सलाहकार नियुक्त किया गया है।

मनोज कलाकोटी: इन्हें उत्तराखंड अनुसूचित जाति (SC) आयोग का उपाध्यक्ष बनाया गया है।

GMVN में नियुक्तियां: गढ़वाल मंडल विकास निगम में भी नियुक्तियों की झड़ी लगी है। बीजेपी नेता विशाल गुप्ता, पारस गोयल और रितु मित्र को जीएमवीएन में गैर-सरकारी निदेशक की जिम्मेदारी दी गई है।

दलबदलुओं और वरिष्ठ नेताओं को भी मिला बड़ा सम्मान

ताजा सूची से ठीक एक दिन पहले भी सरकार ने कई चौंकाने वाले नाम सामने रखे थे, जिसमें कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए नेताओं का विशेष ध्यान रखा गया है:

नेता का नाम मिला हुआ दायित्व / पद राजनीतिक महत्व
दिनेश अग्रवाल सलाहकार, सेतु आयोग कांग्रेस के पूर्व कैबिनेट मंत्री रहे हैं। बीजेपी में आने के बाद यह इनका पहला बड़ा इनाम है।
जोत सिंह बिष्ट उपाध्यक्ष, ग्रामीण अभियंत्रण सेवा परिषद पर्वतीय क्षेत्रों में मजबूत पकड़ रखने वाले वरिष्ठ नेता।
ज्योति कोटिया अध्यक्ष, गोरखा कल्याण परिषद गोरखा समाज में बड़ा प्रभाव, एक खास वर्ग को राजनीतिक संदेश।
अभिषेक शाही उपाध्यक्ष, गोरखा कल्याण परिषद गोरखा समाज के युवाओं के बीच पैठ मजबूत करने की कोशिश।
गंभीर सिंह धामी / शमशेर सिंह बिष्ट उपाध्यक्ष, पूर्व सैनिक कल्याण परिषद पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के बड़े वोट बैंक को साधने की रणनीति।
अनुराधा वालिया उपाध्यक्ष, माटी कला बोर्ड संगठन में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को मजबूत करने का प्रयास।

चुनावी समीकरण और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश

पार्टी के भीतर लंबे समय से दायित्वों की प्रतीक्षा कर रहे नेताओं में असंतोष की चर्चाएं थीं। ऐसे में सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों, जातीय समूहों, सामाजिक संगठनों और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह सूची जारी की है। इसके जरिए बीजेपी उन चेहरों को सम्मानजनक पद दे रही है, जिन्होंने संगठन के लिए जमीन पर पसीना बहाया है।

विपक्ष का तीखा हमला:लगातार हो रहे इस दायित्व वितरण पर विपक्षी दलों ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार प्रशासनिक सुधारों और जनहित के मुद्दों को छोड़कर केवल अपना राजनीतिक संतुलन साधने और सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ाने में व्यस्त है।

अभी और लंबी हो सकती है सूची

बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि आयोगों और निगमों को प्रभावी ढंग से चलाने के लिए अनुभवी लोगों की जरूरत होती है। राजनीतिक हलकों में चर्चा गर्म है कि यह सूची अभी अंतिम नहीं है; आने वाले दिनों में कुछ अन्य बोर्डों और निगमों में भी नियुक्तियों की अगली लिस्ट सामने आ सकती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button